मऊगंज/नईगढ़ी (कुंडेश्वर टाइम्स) एक तरफ सरकार द्वारा राजस्व महा अभियान चलाकर लंबित प्रकरणों के त्वरित निराकरण के दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। जनपद पंचायत नईगढ़ी की भूमि पर वर्षों से चला आ रहा अतिक्रमण अब भी यथावत है, जबकि इसे हटाने के लिए सामान्य सभा द्वारा पारित प्रस्ताव तक का पालन नहीं हो सका है।
सूत्रों के अनुसार वर्ष 2024 से लगातार पत्राचार और प्रशासन को अवगत कराने के बावजूद स्थिति में कोई ठोस बदलाव नहीं आया। जनपद पंचायत की सामान्य सभा—जो पंचायत राज व्यवस्था का सर्वोच्च निर्णय मंच है—के प्रस्तावों को नजरअंदाज किया जाना अब प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
“सामान्य सभा की अवमानना” – अध्यक्ष
जनपद पंचायत अध्यक्ष ममता कुंज बिहारी तिवारी ने कड़े शब्दों में कहा कि—
“हमने हर स्तर पर प्रयास किया, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री तक पत्राचार किया, लेकिन जनपद की जमीन आज भी अतिक्रमण से मुक्त नहीं हो सकी। यदि जनपद पंचायत के विधिवत पारित प्रस्तावों का भी पालन नहीं होगा, तो यह सीधे-सीधे सामान्य सभा की अवमानना है।”
उन्होंने आगे कहा कि यदि निर्णय “ताकतवर लोगों के फोन” से ही होने हैं, तो फिर पंचायत चुनाव कराने का औचित्य ही क्या रह जाता है।

पंचायत राज अधिनियम क्या कहता है?
मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, 1993 के अनुसार—
धारा 49/50 (सामान्य सभा/जनपद पंचायत की शक्तियां) के तहत सामान्य सभा द्वारा पारित प्रस्तावों का क्रियान्वयन संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी होती है।
धारा 69 (अधिकार एवं कर्तव्य) के अनुसार पंचायत की संपत्तियों की सुरक्षा और अतिक्रमण हटाना प्रशासनिक दायित्व है।
धारा 85 (अतिक्रमण हटाने की शक्ति) में स्पष्ट प्रावधान है कि पंचायत भूमि से अतिक्रमण हटाना अनिवार्य प्रशासनिक कार्रवाई है।
इन प्रावधानों के बावजूद कार्रवाई न होना कानून के उल्लंघन की श्रेणी में माना जा रहा है।

जनप्रतिनिधियों की अनदेखी का आरोप
जनपद क्षेत्र के कई सदस्यों का आरोप है कि 3-4 पंचायतों का प्रतिनिधित्व करने वाले निर्वाचित सदस्यों की भी सुनवाई नहीं हो रही। जबकि दूसरी ओर “प्रभावशाली लोगों” के दबाव में निर्णय लिए जाने की चर्चा क्षेत्र में आम है।
अध्यक्ष ने दी हाईकोर्ट जाने की चेतावनी
जनपद अध्यक्ष ने स्पष्ट किया है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वह इस पूरे मामले को लेकर माननीय उच्च न्यायालय की शरण लेंगी, ताकि पंचायत राज व्यवस्था और कानून का सम्मान सुनिश्चित किया जा सके।
बड़ा सवाल
सरकार एक ओर पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर यदि पंचायत की अपनी जमीन ही अतिक्रमण से मुक्त नहीं हो पा रही, तो क्या यह पूरे सिस्टम पर सवाल नहीं उठाता?

















