नईगढ़ी क्षेत्र की दर्जनों योजनाओं में टेंडर, अनुबंध, भुगतान और प्रगति का रिकॉर्ड मौजूद, लेकिन जमीनी हकीकत पर अब भी कार्रवाई नहीं होने से उठ रहे सवाल

मऊगंज/नईगढ़ी (कुंडेश्वर टाइम्स) जल जीवन मिशन के नाम पर नईगढ़ी विकासखंड में करोड़ों रुपये की योजनाओं के दस्तावेज मौजूद हैं, ठेके, अनुबंध, लागत, संशोधित लागत, प्रगति और कई स्थानों पर पूर्णता का उल्लेख भी दर्ज है, लेकिन इसके बावजूद अगर ग्रामीण इलाकों में आज भी जलापूर्ति की स्थिति संतोषजनक नहीं है और शिकायतों पर कार्रवाई नहीं हो रही, तो यह पूरा मामला बड़े प्रशासनिक सवाल खड़े करता है। उपलब्ध दस्तावेजों में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, खंड मऊगंज/त्योंथर से नईगढ़ी क्षेत्र की कई ग्राम पंचायतों में जल जीवन मिशन के तहत पाइप जलप्रदाय योजनाओं के अनुबंध, लागत और प्रगति का ब्यौरा दर्ज है।
दस्तावेजों में वर्ष 2020 और 2021 के दौरान छमखकला, करहियार गांव, मुड़िला, पहाड़ा, पड़ेरिया कला, पथरौला मुड़ियन, उमरिया खोहिरियान, हर्दी तिवरियान, पुरैनी, बढ़वा कोठार, पिपरा, सुमेदकला, इटहाका, जुझमुनिया, रामपुर, बरोही, कुशाही, मडना, खटखरी, शिवराजपुर, करह उर्फ खेराघाट, मांडूकला, अटरा, डिहिया, तिविरियान उर्फ जड़गन, पोखरहा उर्फ पमिखिया, डोभी, बेड़ुआ, मुआ, छुहिया, पकरा, सेही, खिरका, कबरहा-95, कबरहा-96, टिपिया, अतरैला, सुकुली, जिलहड़ी, सुमेदा खुर्द और हसलों 1056 जैसे गांवों की योजनाएं दर्ज हैं। कई प्रविष्टियों में लाखों रुपये की मूल और पुनरीक्षित लागत दिखाई गई है।
रिकॉर्ड में कुछ योजनाओं की अनुमानित लागत 80.77 लाख, 97.87 लाख, 90.24 लाख और 159.09 लाख रुपये तक दिखाई गई है, जबकि बाद की तालिकाओं में कई समूह योजनाओं की कुल लागत और संशोधित लागत करोड़ों के स्तर तक दर्ज है। एक तालिका में नईगढ़ी विकासखंड की जल प्रदाय योजनाओं के अनुबंध, संविदाकार और भुगतान संबंधी विवरण में कई योजनाएं “पूर्ण” तथा कई “प्रगतिरत” दर्ज हैं। इसके बाद दूसरी तालिकाओं में पंप हाउस, उच्च स्तरीय टंकी, सम्पवेल, पाइपलाइन और एफएचटीसी (FHTC) की स्थिति भी दर्शाई गई है। यानी कागज पर काम का पूरा ढांचा मौजूद है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब फाइलों में अनुबंध, कार्यादेश, संशोधित लागत, भुगतान और प्रगति का पूरा विवरण उपलब्ध है, तो फिर शिकायतों के बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही। ग्रामीणों का आरोप है कि कई स्थानों पर योजनाएं कागजों में आगे बढ़ीं, लेकिन वास्तविक लाभ आम लोगों तक अपेक्षित रूप में नहीं पहुंचा। ऐसे में यह मामला सिर्फ तकनीकी देरी का नहीं, बल्कि जवाबदेही का बनता जा रहा है।

दस्तावेजों से यह भी स्पष्ट होता है कि नईगढ़ी क्षेत्र में जल जीवन मिशन के तहत बड़ी संख्या में गांवों को कवर करते हुए अलग-अलग ठेकेदारों को काम सौंपा गया था। जब इतना व्यापक नेटवर्क स्वीकृत हुआ, तो फिर यह जानना जरूरी है कि किन योजनाओं में वास्तविक जलप्रदाय शुरू हुआ, किनमें सिर्फ संरचना बनी, किनमें एफएचटीसी अधूरे हैं, और किन मामलों में भुगतान के अनुपात में काम नहीं हुआ। यही वह बिंदु है, जहां जांच की मांग तेज हो रही है।
स्थानीय स्तर पर अब यह मांग उठ रही है कि नईगढ़ी क्षेत्र की सभी जल जीवन मिशन योजनाओं का भौतिक सत्यापन, ग्रामवार पंचनामा, कार्य गुणवत्ता परीक्षण, भुगतान बनाम कार्य प्रगति का मिलान और जिम्मेदार अधिकारियों-ठेकेदारों की भूमिका की जांच कराई जाए। क्योंकि यदि करोड़ों की योजना के बाद भी गांवों में पानी का संकट बना हुआ है, तो यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि संभावित वित्तीय अनियमितता का भी संकेत हो सकता है।
मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि जल जीवन मिशन केंद्र और राज्य सरकार की प्रमुख योजना है। यदि इसी योजना में गड़बड़ियों के आरोप लगते हैं और शिकायतों पर भी ठोस कार्रवाई नहीं होती, तो यह सीधे शासन की मंशा और निगरानी व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगाता है। अब देखना यह है कि प्रशासन इन दस्तावेजों को आधार बनाकर पारदर्शी जांच कराता है या फिर यह मामला भी फाइलों तक सीमित रह जाता है।

















