रीवा। (कुंडेश्वर टाइम्स)
रीवा जिले के सोहागी स्थित आरटीओ चेक पोस्ट पर मंगलवार रात उस समय हालात बेकाबू हो गए, जब कथित अवैध वसूली और उत्पीड़न से नाराज ट्रक चालकों का गुस्सा फूट पड़ा। विवाद के दौरान एक ट्रक चालक के साथ मारपीट की घटना सामने आई, जिसमें उसका सिर फूट गया। घटना के विरोध में आक्रोशित चालकों ने करीब आधे घंटे तक हाईवे पर चक्का जाम कर दिया, जिससे यातायात पूरी तरह बाधित हो गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, चेकिंग के दौरान आरटीओ कर्मचारियों और चालकों के बीच कहासुनी शुरू हुई, जो देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गई। आरोप है कि आरटीओ अमले द्वारा चालक के साथ मारपीट की गई, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और चालकों ने विरोध स्वरूप सड़क जाम कर दी।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच आरटीओ अधिकारी मनीष त्रिपाठी की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। वाहन चालकों और परिवहन व्यवसायियों का आरोप है कि सोहागी चेक पोस्ट पर लंबे समय से अवैध वसूली का सिलसिला जारी है। स्थानीय लोगों में चर्चा है कि संबंधित अधिकारी पिछले लगभग दस वर्षों से यहां अंगद के पांव की तरह जमे हुए हैं—अब सवाल उठ रहा है कि आखिर किसकी मेहरबानी से यह स्थिति बनी हुई है।
आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि चेकिंग के नाम पर वाहन चालकों को अनावश्यक रूप से परेशान किया जाता है और नियमों की आड़ में मनमाने तरीके से वसूली की जाती है। बावजूद इसके अब तक किसी भी स्तर पर ठोस और प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।
हंगामे के दौरान गुस्साए चालकों ने हाईवे डिवाइडर पर बनी झोपड़ियों को नुकसान पहुंचाया। स्थिति बिगड़ती देख आरटीओ कर्मचारी मौके से हट गए। सूचना मिलते ही सोहागी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और समझाइश देकर जाम समाप्त कराया, जिसके बाद यातायात बहाल हो सका।
पुलिस के अनुसार, घायल चालक की ओर से आवेदन दिए जाने की बात सामने आई है, लेकिन समाचार लिखे जाने तक किसी भी पक्ष द्वारा औपचारिक एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई है। पुलिस का कहना है कि शिकायत मिलने पर पूरे मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
घटना के बाद परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों और सामाजिक संगठनों में आक्रोश व्याप्त है। लगातार उठ रहे आरोपों के बावजूद प्रशासनिक निष्क्रियता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अब देखना यह होगा कि इस मामले में निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई होती है या फिर यह मुद्दा भी समय के साथ ठंडे बस्ते में चला



















