सिंगरौली। (कुंडेश्वर टाइम्स)
जाको प्रभु दारुण दुख दीन्हा ताकर मति पहले हर लिन्हा,गोस्वामी तुलसीदास जी की यह चौपाई इन दिनों तब चरितार्थ होती दिख रही है, जब क्षेत्र के एक रसूखदार नेता और नगर सेठ का महिला के साथ अभद्रता का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वायरल वीडियो में महिला के साथ मारपीट करने वाले इन नेताजी ने अपने आचरण से अपने पूर्वजों के नाम को भी धूमिल कर दिया है। कहा जाता है कि व्यक्ति अवसर पाकर चाहे कितना भी बड़ा बन जाए किंतु उसका वास्तविक चरित्र सामने आ ही जाता है
विवादों व भ्रष्टाचार का रहा है पुराना इतिहास
उक्त नेता का अतीत भी विवादों और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरा रहा है जानकारों की माने तो 80 से 90 के दशक में कोटेदारी और केरोसिन की कालाबाजारी के जरिए इनकी राजनीति की शुरुआत हुई थी। उस दौर में तत्कालीन मंत्री पुत्रों का इनके प्रतिष्ठान पर संरक्षण प्राप्त था भाजपा से जुड़े होने के बावजूद कांग्रेस सरकार के दौर में भी इनका व्यापारिक रसूख कायम रहा पर संपत्तियों पर अधिकार जमाने और विवादों में घिरे रहने के मामले इनके लिए कोई नई बात नहीं है
पार्टी निष्ठा और जातिगत राजनीति पर सवाल
हैरानी की बात यह है कि सत्ताधारी दल के बड़े नेता खुद को बताने के बावजूद चुनावों में इनकी सक्रियता पर हमेशा सवाल उठते रहे हैं चर्चा है कि इन्होंने कभी पार्टी प्रत्याशी का खुलकर प्रचार नहीं किया यहाँ तक कि इनके निजी वोट पर भी संदेह जताया जाता रहा है आरोप है कि इन्होंने अक्सर निजी विवादों को बिरादरी का रंग देकर सामुदायिक विवाद खड़ा करने की साजिश रची है बिरादरी के नाम पर पंचायत चुनाव जीतने के बाद भी इन्होंने अपने ही समाज के उन लोगों को नीचा दिखाने का प्रयास किया जो इनके गलत कार्यों का समर्थन नहीं करते अब पार्टी के रसूख के दम पर जिस तरह से नेताजी महिलाओं के साथ मारपीट कर रहे हैं ऐसे में अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या पार्टी सिर्फ नेतृत्व महिलाओं के साथ मारपीट करने वाले नेताजी से समस्त दायित्व छीनती है या नहीं क्योंकि भाजपा महिलाओं के सम्मान को लेकर खुद को तत्पर बताती है
पीड़ित महिला को क्या मिल पाएगा न्याय
एक ओर प्रदेश सरकार महिला सुरक्षा के प्रति खुद को तत्पर बताती है, वहीं दूसरी ओर पार्टी से जुड़े रसूखदार चेहरों का ऐसा व्यवहार सरकार की छवि पर दाग लगा रहा है यदि इस वायरल वीडियो पर दबावमुक्त होकर कानूनी कार्रवाई नहीं होती तो इसकी पूरी जवाबदेही प्रशासन की होगी माना जा रहा है कि पीड़ित परिवार को रसूख के दम पर शांत रहने के लिए यदि मजबूर किया गया तो क्या उस मा समान बुजुर्ग महिला को न्याय मिल पाएगा जिसके साथ नेताजी ने अभद्रता व मारपीट की है



















