रीवा( कुंडेश्वर टाइम्स)
रीवा जिले के सेमरिया विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत मधेपुर में जनसमस्याओं को लेकर बुधवार को व्यापक जनआक्रोश देखने को मिला। क्षेत्रीय विधायक अभय मिश्रा के नेतृत्व में अल्ट्राटेक सीमेंट प्लांट के मुख्य द्वार के सामने एक दिवसीय धरना प्रदर्शन आयोजित किया गया, जिसमें हजारों की संख्या में किसान, मजदूर, महिलाएं और युवा शामिल हुए। सुबह लगभग 10 बजे शुरू हुआ यह धरना दोपहर तक जारी रहा और पूरे क्षेत्र में आंदोलन की गूंज सुनाई दी।
धरना स्थल पर उपस्थित ग्रामीणों ने रोजगार, प्रदूषण और बुनियादी सुविधाओं के अभाव को लेकर अपनी पीड़ा खुलकर व्यक्त की। स्थानीय लोगों का कहना था कि प्लांट स्थापित होने के बाद उन्हें रोजगार के बड़े अवसर मिलने की उम्मीद थी, लेकिन अधिकांश स्थानीय युवाओं को काम नहीं मिल पाया। वहीं, प्लांट से निकलने वाले धूल और धुएं के कारण खेती-किसानी प्रभावित हो रही है और लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
किसानों ने आरोप लगाया कि प्रदूषण के चलते फसल उत्पादन में गिरावट आई है, जबकि मजदूरों ने स्थानीय लोगों की अनदेखी कर बाहरी श्रमिकों को प्राथमिकता देने का मुद्दा उठाया। महिलाओं ने पेयजल संकट, स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और गांवों में मूलभूत विकास कार्यों के अभाव को लेकर नाराजगी जताई।

धरना को संबोधित करते हुए विधायक अभय मिश्रा ने कहा कि मधेपुर सहित आसपास के गांवों के लोग लंबे समय से समस्याओं से जूझ रहे हैं, लेकिन कंपनी प्रबंधन और प्रशासन द्वारा बार-बार शिकायतों के बावजूद कोई ठोस समाधान नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि होने के नाते वे क्षेत्रवासियों की आवाज को दबने नहीं देंगे और उनकी हर जायज मांग के लिए संघर्ष करेंगे।
विधायक ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि जल्द ही रोजगार, प्रदूषण नियंत्रण और विकास से जुड़ी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो आगामी 1 मई (मजदूर दिवस) को 25 हजार समर्थकों के साथ एक विशाल आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर प्लांट की तालाबंदी जैसे कठोर कदम उठाने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
धरना प्रदर्शन के दौरान प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। वहीं तहसीलदार, एसडीएम सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर मौजूद रहे और पूरे कार्यक्रम की निगरानी करते रहे।
सूत्रों के अनुसार, प्रशासन द्वारा प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर उनकी समस्याओं को समझने का प्रयास किया गया है और संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए जा सकते हैं। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि जब तक जमीन पर ठोस परिणाम नहीं दिखते, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
धरना समाप्ति के बाद भी क्षेत्र में आंदोलन की चर्चा बनी रही और लोगों के बीच आगामी 1 मई को प्रस्तावित बड़े प्रदर्शन को लेकर रणनीति पर मंथन शुरू हो गया है। यदि समय रहते समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है, जिससे प्रशासन और कंपनी प्रबंधन दोनों के लिए चुनौती खड़ी हो सकती है।



















