दमोह। भगवती मानव कल्याण संगठन शाखा दमोह ने संत रामपाल एवं उनसे संबंधित संस्थाओं की कथित गतिविधियों को लेकर मोर्चा खोल दिया है। संगठन के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने जिला कलेक्टर एवं SP को विस्तृत ज्ञापन सौंपकर धार्मिक पुस्तकों, प्रचार-प्रसार सामग्री, सोशल मीडिया पोस्ट और विभिन्न धार्मिक गतिविधियों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। ज्ञापन में संगठन ने आरोप लगाया है कि कुछ प्रचार माध्यमों के जरिए सनातन धर्म, हिंदू देवी-देवताओं, धार्मिक परंपराओं एवं अन्य आध्यात्मिक संतों के प्रति आपत्तिजनक सामग्री और टिप्पणियां प्रसारित की जा रही हैं, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत होने और सामाजिक सौहार्द प्रभावित होने की आशंका है। 
धार्मिक पुस्तकों और प्रचार सामग्री की जांच की मांग
संगठन ने अपने ज्ञापन में आरोप लगाया है कि संत रामपाल एवं उनसे संबंधित प्रचार-प्रसार माध्यमों द्वारा प्रकाशित पुस्तकों, प्रवचनों और सोशल मीडिया सामग्री में भगवान श्रीराम, भगवान श्रीकृष्ण, माता दुर्गा सहित अन्य हिंदू देवी-देवताओं की मान्यताओं एवं उपासना पद्धतियों पर कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणियां की जाती हैं।
संगठन ने चारों वेद, श्रीमद्भगवद्गीता, उपनिषद, रामायण एवं श्रीरामचरितमानस के नाम पर प्रकाशित पुस्तकों की मूल धार्मिक ग्रंथों से तुलना कराने तथा अनुवाद एवं व्याख्या की प्रमाणिकता की निष्पक्ष विशेषज्ञों से जांच कराने की मांग की है
संतों और आध्यात्मिक गुरुओं के खिलाफ टिप्पणियों पर आपत्ति
ज्ञापन में अन्य धार्मिक संतों एवं आध्यात्मिक गुरुओं के प्रति कथित अभद्र भाषा, अपमानजनक टिप्पणियों और गाली-गलौज का प्रयोग किए जाने की शिकायत भी उठाई गई है। संगठन ने परम पूज्य गुरुदेव श्री शक्तिपुत्र जी महाराज एवं उनके आध्यात्मिक कार्यों के संबंध में सोशल मीडिया पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों का उल्लेख करते हुए उपलब्ध वीडियो, ऑडियो एवं डिजिटल साक्ष्यों की जांच कराने की मांग की है।
राजगढ़ हत्याकांड और धार्मिक विवाद की निष्पक्ष जांच की मांग
ज्ञापन में मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के ग्राम गुराड़खेड़ा में अक्टूबर 2026 में गायत्रीबाई गुर्जर की उनके पति द्वारा कथित तौर पर कुल्हाड़ी से हत्या किए जाने की घटना का भी उल्लेख किया गया है। संगठन के अनुसार प्रकाशित समाचारों एवं परिजनों के बयानों में आरोपी के संत रामपाल का अनुयायी होने और घर में देवी-देवताओं की पूजा-पाठ तथा धार्मिक त्योहार मनाने को लेकर विवाद होने की बात सामने आई थी।
हालांकि संगठन ने स्पष्ट किया है कि हत्या की व्यक्तिगत आपराधिक जिम्मेदारी आरोपी की है, लेकिन घटना के पीछे बताए जा रहे धार्मिक विवाद और प्रचार के संभावित प्रभावों की भी निष्पक्ष जांच होनीचाहिए।
ज्ञापन में दमोह जिले के दमोह नगर निरीक्षक हरिराम पांडे की भूमिका को लेकर भी शिकायत दर्ज कराई गई है। संगठन ने आरोप लगाया है कि संत रामपाल एवं उनके कथित अनुयायियों से संबंधित प्रचार गतिविधियों को लेकर कुछ गंभीर शिकायतें हैं। संगठन ने संबंधित तथ्यों की जांच कर दोषी पाए जाने पर विभागीय एवं वैधानिक कार्रवाई की मांग की है।
इसके अतिरिक्त ज्ञापन में दमोह देहात थाना क्षेत्र के ग्राम मरहार निवासी दिनेश दास पटेल का उल्लेख किया गया है। संगठन के अनुसार वह संत रामपाल का शिष्य है तथा उसके द्वारा परम पूज्य श्री शक्तिपुत्र जी महाराज की एआई से तैयार की गई कथित आपत्तिजनक तस्वीर शराब एवं मांस के साथ बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल की गई थी। इस संबंध में 26 अक्टूबर 2026 को पुलिस अधीक्षक दमोह एवं दमोह देहात थाने में शिकायत किए जाने का उल्लेख करते हुए तत्काल एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है।
हाईकोर्ट की जमानत शर्तों की जांच की भी मांग
संगठन ने अपने आवेदन में संत रामपाल को मिली जमानत की शर्तों के कथित उल्लंघन का मुद्दा भी उठाया है। ज्ञापन में वर्ष 2014 में न्यायालय में दिए गए कथित बयानों और उसके बाद उनके अनुयायियों एवं प्रचार माध्यमों की गतिविधियों के बीच अंतर की जांच कराने की मांग की गई है। संगठन ने इस संबंध में उच्चस्तरीय जांच टीम गठित कर तथ्यों का परीक्षण कराने की मांग रखी है।
सात प्रमुख मांगों के साथ कार्रवाई की मांग
भगवती मानव कल्याण संगठन ने ज्ञापन के माध्यम से सात प्रमुख मांगें प्रशासन के सामने रखी हैं। इनमें धार्मिक पुस्तकों एवं प्रचार सामग्री की निष्पक्ष जांच, मूल धार्मिक ग्रंथों से तुलना, देवी-देवताओं एवं संतों के प्रति कथित अपमानजनक टिप्पणियों की जांच, श्री शक्तिपुत्र जी महाराज के संबंध में वायरल सामग्री के डिजिटल साक्ष्यों का परीक्षण, राजगढ़ हत्याकांड से जुड़े धार्मिक विवाद की जांच, अपराध प्रमाणित होने पर भारतीय न्याय संहिता एवं अन्य प्रचलित कानूनों के तहत एफआईआर और वैधानिक कार्रवाई तथा जिले में धार्मिक तनाव फैलाने वाली गतिविधियों पर निगरानी रखने की मांग शामिल है।
संगठन ने स्पष्ट किया कि वह किसी भी व्यक्ति की व्यक्तिगत धार्मिक मान्यता अथवा पूजा-पद्धति के विरुद्ध नहीं है। प्रत्येक व्यक्ति को अपनी धार्मिक परंपराओं का पालन करने और उनका प्रचार करने की स्वतंत्रता है, लेकिन किसी दूसरे धर्म, देवी-देवताओं, संतों अथवा धार्मिक मान्यताओं का अपमान करने और सामाजिक वैमनस्य फैलाने वाली गतिविधियों पर कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
अब देखना होगा कि संगठन द्वारा उठाए गए इन गंभीर मुद्दों पर जिला प्रशासन एवं पुलिस विभाग क्या कदम उठाते हैं और संबंधित शिकायतों की जांच के बाद क्या कार्रवाई सामने आती है।
















