नागपुर में वर्षों से अधर में निजी बस स्टॉप का निर्माण मनपा असहाय। कुंडेश्वर टाइम्स ब्यूरो राजा गौतम की रिपोर्ट

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नागपुर (कुंडेश्वर टाइम्स)_देश के औद्योगिक व्यवस्था की रीढ़ की हड्डी कहे जाने वाले परिवहन उद्योग पर सरकार और कोर्ट की सख्ती से आए दिन ऑपरेटर्स और पुलिस प्रशासन को दो चार होने की विषम परिस्थित पैदा होती रहती है । शहर की चरमराती ट्रैफिक व्यवस्था के विरोध में जब कतिपय सामाजिक संगठन कोर्ट की शरण में चले जाते हैं तब शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को संतुलित बनाए रखने के लिए न्यायालय पुलिस के ऊपर सख्त दबाव बनाकर यातायात को सुचारू रूप से संचालित होने का निर्देश जारी करता है किंतु समस्या के निदान की जड़ तक ना तो कोर्ट पहुंच पाता है और ना ही सरकार के ऊंचे पदों पर बैठे हुए सरकारी नुमाइंदे और इसी भ्रम में सरकार को भारी भरकम टैक्स अदायगी करने के बाद भी चाहे बस हो या ट्रक ऑपरेटर आपदा का शिकार हो रहे हैं ।

प्रमुख विषय

 

शहर का बढ़ता भौगोलिक , चिकित्सीय और औद्योगिक दायरे के मार्ग सेशहर के अंदर ट्रैफिक का दबाव बढ़ना स्वाभाविक है जिसे संतुलित करने के लिए कोर्ट का हंटर पुलिस के ऊपर जाता है और पुलिस की सख्ती का दवाब ट्रक ऑपरेटरों की अपेक्षा बस ऑपरेटरों के ऊपर अधिक पड़ता है क्योंकि अन्य राज्यों से आने वाले यात्रियों को शहर के अंदर चिकित्सा , उद्योग , शिक्षा , तथा अन्य व्यावसायिक हित जुड़े होते हैं । शहर के अंदर प्रवेश करने वाले यात्री रेलमार्ग , हवाईमार्ग और सड़क मार्ग से प्रवेश करते है किंतु शहर में बढ़ते ट्रैफिक दबाव का ठीकरा बार बार यात्री बसों के ऊपर पुलिस के ऊपर सख्ती द्वारा फोड़ा जाता है किंतु कोर्ट का रुख अगर पुलिस को टारगेट करने की जगह सरकार और मनपा को निर्देशित किया जाय तो शहर के अंदर बढ़ते ट्रैफिक दबाव को नियंत्रित कर पाने में आसानी होगी । शहर के पड़ोसी राज्यों में सरकार द्वारा निर्मित आधुनिक बस स्टैंडों की तर्ज पर उपराजधानी में भी आधुनिक बस स्टॉप एवं सर्वसुविधायुक्त भव्य यात्री प्रतीक्षालय के नव निर्माण की संपूर्ण गुंजाइश उपलब्ध है । ई रिक्शा उद्योग को बढ़ावा मिलने से इनकी संख्या में इजाफा होना किंतु किसी प्रकार का सरकारी अंकुश नहीं होना भी शहरी यातायात के लिए बाधक हैं । नागपुर शहर के अंदर बसों का प्रवेश अगर बेहद खतरनाक है तो प्रादेशिक सीमा में लगने वाले चेक प्वाइंट से अंदर क्यों नहीं प्रतिबंधित कर दिया जाता है ।

विकास और हमारा नागपुर

विकास की दृष्टिकोण से कई प्रकार की उपलब्धियां समेटे नागपुर शहर यात्रियों के सुगमआवागमन के लिए बसों का अपना महत्वपूर्ण स्थान है । यात्री परिवहन को सर्वसमावेशी बनाने के लिए प्रदेश का परिवहन मंत्रालय उपराजधानी के वरिष्ठों की कमेटी गठित कर स्थाई समाधान की दिशा में पहल करें । भ्रष्टाचार भारत की जननी है न खाऊंगा न खाने दूंगा कहावत है ट्रेन में बेटिकट पाए जाने पर सजा का प्रावधान इतना अधिक है कि 5 हजार करोड़ का भ्रष्टाचार करने वाले के लिए भी नहीं है । संविधान में निहित समान नागरिक संहिता , और समानता की जिस तंत्र में धज्जियां उड़ रही हों उस लोकतांत्रिक व्यवस्था की जय हो । बंदे मातरम् , भारत माता की जय ,
मुखर्जी जी के उस सपने की जय हो एक देश _दो निशान दो विधान नहीं चलेंगे ।

समस्या और समाधान क्या मनपा करेगी विचार

 

देश प्रदेशों के एक कोने से दूसरे कोने तक एकता के सूत्र में पिरोने वाले सड़क मार्ग से यात्रा करने वाले यात्रियों के मार्ग में बाधा उत्पन्न करना सरकारों के पिछड़ापन को दर्शाता है केंद्र सरकार द्वारा राज्यों के विकास के लिए बजट में हजारों करोड़ का बजट उपलब्ध कराती है फिर भी प्रशासनिक स्तर पर व्यवस्थकीय विसंगतियों की उत्पन्नता का असर सामान्य जीवनचर्या पर प्रभावित होने से आंदोलन , हड़ताल , धरना , प्रदर्शन व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह है । जिस तीव्र गति से शहर का विकास हो रहा है उसी तीव्रता से सुविधाओं का विस्तार भी आवश्यक है । शहर में उत्पन्न होने वाली प्रत्येक समस्या का जिम्मेदार पुलिस के हस्ते कर देने से सरकार समस्या की अनदेखी नहीं कर सकती इसके लिए व्यवसायियों , सामाजिक संगठनों को साथ लेकर कार्य करना होगा । शहर में प्रदेश के सत्ता की कई समितियां मनपा के अधीन संचालित है जिनमें परिवहन समिति और झोपड़पट्टी आघाड़ी में कार्य करने की बड़ी गुंजाइश है जिसे मनपा और जिला नियोजन समिति के समन्वय से समाधान किया जा सकता है चाहे वह शहर में निजी बस स्टॉप की समस्या हो या झोपड़पट्टियों को पट्टा आबंटित किए जाने की । इन दोनों समस्याओं से शहर का आम जन जीवन प्रभावित होता है और सरकार की मंद कार्यप्रणाली से साख पर बट्टा लग रहा है । शहर की नवागत महापौर नीता जी ठाकरे , ट्रैफिक उपायुक्त, प्रादेशिक परिवहन अधिकारी एवं परिवहन सचिव महाराष्ट्र शासन शहर में निजी बस स्टॉप स्थापित करने की दिशा में आगे आकर ट्रैवल्स व्यवसाय से जुड़े हजारों बेरोजगारों की जीविका का मार्ग प्रशस्त कर पुलिस का बोझ कम करें ताकि शहर के अंदर बेतरतीब खड़ी होने बाली यात्री बसों को उपयुक्त ठिकाना मिल सके और इससे उत्पन्न हो रहे लिवाली संकट को विराम देकर शहर के यातायात को नियंत्रित एवं आम जनमानस के हित में बहाल किया जा सके ।

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