हरियाली तीज भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन और उनकी अटूट भक्ति के उपलक्ष्य में मनाई जाती है।  / मोहन पटेल की खास रिपोर्ट

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दमोह / हरियाली तीज क्यों मनाई जाती है पढे विस्तारसे शिव-पार्वती मिलन: पौराणिक कथा के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी

*108वां जन्म*

 माता पार्वती ने 107 जन्मों तक साधना की, लेकिन उन्हें शिवजी प्राप्त नहीं हुए। 108वें जन्म में श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया को उनकी तपस्या सफल हुई और भगवान शिव ने उन्हें अपनी पत्नी के रूप मे स्वीकार किया था

*महत्व और कथा*

पति-पत्नी के प्रेम का प्रतीक*: मान्यता है कि इसी दिन माता पार्वती ने 107 जन्मों की तपस्या के बाद भगवान शिव को पति रूप में पाया था। इसलिए ये पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए मनाया जाता है।

*हरियाली का प्रतीक*

 सावन महीने में बारिश के कारण चारों तरफ हरियाली छा जाती है, इसलिए इसे ‘हरियाली तीज’ कहा जाता है। यह प्रकृति और प्रेम का उत्सव है। 

*मुख्य परंपराएं और महत्व*

अखंड सौभाग्य का व्रत: सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य के लिए यह निर्जला (बिना पानी के) व्रत रखती हैं। 

सोलह श्रृंगार: इस दिन महिलाएं हरे रंग की साड़ी, हरी चूड़ियाँ पहनती हैं और हाथों में मेहंदी लगाती हैं। 

झूला और गीत: महिलाएं मिलकर पेड़ो पर झूला झूलती हैं और पारंपरिक लोकगीत गाकर उत्सव मनाती हैं

शिव-पार्वती पूजा: इस दिन विधि-विधान से शिव-पार्वती की पूजा की जाती है और कथा सुनी जाती है

*पूजा*: 

शिव-पार्वती की मिट्टी की मूर्ति बनाकर पूजा की जाती है। बेलपत्र, फूल, मिठाई चढ़ाते हैं।

– *खाने में*:

 घेवर, गेहूं के लड्डू, मालपुआ जैसी मिठाइयां बनती हैं।

*कहां खास है*

राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार और गुजरात में ये त्योहार बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। जयपुर में तो हरियाली तीज पर राजकीय झूला निकलता है।

*इस दिन क्या न करें*

व्रत के दिन झूठ, लड़ाई-झगड़े से बचें। दिनभर शिव-पार्वती का भजन और कथा सुनी जाती है।

यदि आप शिव-पार्वती की पूजा विधि विधान एव व्रत के नियमों का पालन करते है तो आप पर भी शिव पार्वती जी की कृपा रहेगी

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