शासन की कई हेक्टेयर जमीन पर पड़ी है भू माफियाओं की नजर

सिंगरौली।बरगवां तहसील के डगा क्षेत्र की कई हेक्टेयर शासकीय जमीन का मामला अभी तक निराकृत नहीं हुआ है पिछले दिनों हुए सीमांकन के दौरान आदेश में जिसका नाम, जमीन और सीमांकन लिखा था, उसकी जमीन तो जस की तस रह गई, लेकिन जिसका नाम आदेश में नहीं था, उसकी जमीन का सीमांकन कर दिया गया
बहुमूल्य जमीन पर भू कारोबारियों की नजर
डगा की बहुमूल्य शासकीय जमीन पर लंबे समय से भू-कारोबारियों की नजर है। आरोप है कि इस जमीन को कुछ लोगों ने पट्टे की जमीन बताकर भोले-भाले लोगों को बेच दिया। नतीजा यह हुआ कि कहीं बाउंड्रीवाल खड़ी हो गई, कहीं मकान बन गए और कहीं निर्माण की तैयारी चल रही है। इस शासकीय जमीन को पट्टे की जमीन बता कर बिक्री करने में एक नाम राजकुमार विश्वकर्मा का भी आ रहा है
तहसीलदार ने किया था बेदखली आदेश
इस पूरे मामले में तहसीलदार बरगवां ने बेदखली का आदेश जारी किया था। बाद में एसडीएम देवसर कार्यालय ने इस आदेश पर स्थगन देते हुए सीमांकन के लिए एक टीम गठित की
आवेदक का नहीं हुआ सीमांकन
आदेश के मुताबिक सीमांकन टीम को आवेदक शिवशंकर पिता नंदलाल साहू की जमीन का सीमांकन करना था। उन्हें सूचना भी दी गई और बताया जाता है कि वे मौके पर मौजूद भी थे। लेकिन सीमांकन नहीं हुआ, और ना ही पंचनामा में हस्ताक्षर ना ही सीमांकन रिपोर्ट में नाम लिखा गया
आदेश में नाम नहीं फिर भी जमीन नप गई
सीमांकन टीम ने अरुण केवट और रमेश साह की जमीन का सीमांकन कर दिया, जबकि आदेश पत्र में उनका नाम शामिल ही नहीं था। सवाल यह उठ रहा है कि जब आदेश में नाम नहीं था फिर भी सीमांकन क्यों किए चलो मान लेते हैं कि शासकीय रकवा दिखा तो सीमांकन कर दिए लेकिन जिनका नाम आदेश पत्र में था उनका भी तो सीमांकन कर देते इधर सीमांकन से असंतुष्ट अनावेदक भरत सिंह ने भी पंचनामा में हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया
पुनः सीमांकन की मांग
डगा क्षेत्र की शासकीय भूमि में हो रहे अतिक्रमण और खरीद-फरोख्त के मामले को राजस्व विभाग तक पहुंचाने वाले राजा सरई निवासी भरत सिंह ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोबारा सीमांकन कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक पूरी शासकीय जमीन का सही सीमांकन नहीं होगा, तब तक भू-माफिया इस जमीन पर कब्जा और खरीद-फरोख्त का खेल खेलते रहेंगे।


















