पश्चिमी विक्षोभ का असर: ग्वालियर-चंबल में बादल, 1.7 डिग्री तक गिरा पारा; 18 मार्च तक कई जिलों में आंधी-बारिश के आसार।

0
71

भोपाल (कुंडेश्वर टाइम्स) मध्य प्रदेश में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है। पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टरबेंस) के प्रभाव से प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज बदला हुआ नजर आ रहा है। खासकर ग्वालियर-चंबल अंचल में रविवार को दिनभर बादल छाए रहने से तापमान में गिरावट दर्ज की गई। मौसम विभाग के अनुसार अधिकतम तापमान में करीब 1.7 डिग्री सेल्सियस तक की कमी आई है। आगामी चार दिनों तक प्रदेश के कई जिलों में आंधी, बादल और हल्की बारिश का दौर जारी रहने की संभावना जताई गई है।

मौसम विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार रविवार को ग्वालियर में अधिकतम तापमान 32.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि दतिया में 32.4 डिग्री, छिंदवाड़ा में 36 डिग्री, सिवनी में 35.6 डिग्री, मंडला में 37.2 डिग्री और बालाघाट में 35 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया। कई जिलों में बारिश तो दर्ज नहीं की गई, लेकिन दिनभर बादल छाए रहने से गर्मी का असर कुछ कम रहा और तापमान में गिरावट देखने को मिली।
इधर नर्मदापुरम जिले में पिछले तीन दिनों से चल रही तीव्र लू के प्रभाव में भी कमी आई है। रविवार को यहां का अधिकतम तापमान घटकर 38.9 डिग्री सेल्सियस पर आ गया। प्रदेश के प्रमुख शहरों की बात करें तो भोपाल में 36.4 डिग्री, इंदौर में 35.5 डिग्री, ग्वालियर में 32.6 डिग्री, उज्जैन में 35.5 डिग्री तथा जबलपुर में 35.7 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान दर्ज किया गया।
मौसम विभाग के अनुसार 18 मार्च तक प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में मौसम में बदलाव बना रहेगा। इस दौरान आंधी, बादल, गरज-चमक के साथ हल्की बारिश होने की संभावना है। माना जा रहा है कि इस वर्ष मार्च माह में पहली बार मावठा की स्थिति बन सकती है, जिससे तापमान में कुछ गिरावट आएगी और लोगों को तेज गर्मी से राहत मिलेगी।
सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ और ट्रफ लाइन की सक्रियता के कारण प्रदेश में मौसम का स्वरूप बदल रहा है। इसके साथ ही 17 मार्च के आसपास एक और नया पश्चिमी विक्षोभ उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित कर सकता है, जिसके प्रभाव से मध्य प्रदेश में बादल, आंधी और हल्की बारिश का दौर लगातार बना रह सकता है।
मौसम विभाग ने आगामी दिनों के लिए कुछ जिलों में विशेष रूप से मौसम खराब रहने की संभावना जताई है। 16 मार्च को बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, मंडला, बालाघाट, डिंडौरी और अनूपपुर जिलों में बादल और हल्की बारिश के आसार हैं। 17 मार्च को सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी और अनूपपुर जिलों में गरज-चमक के साथ बूंदाबांदी हो सकती है। वहीं 18 मार्च को ग्वालियर, भिंड, मुरैना, श्योपुर, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला, बालाघाट, सिवनी, छिंदवाड़ा और पांढुर्णा जिलों में आंधी और बारिश की संभावना जताई गई है।
हालांकि प्रदेश के कई हिस्सों में गर्मी का असर अभी भी बना हुआ है। शनिवार को प्रदेश के अधिकांश जिलों में तेज धूप और गर्म हवाओं का प्रभाव देखा गया। भोपाल, इंदौर सहित कई शहरों में सुबह से ही कड़ी धूप रही, जिससे तापमान में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई। इससे पहले नर्मदापुरम जिले में लगातार दो दिनों तक तीव्र लू चली, जहां दिन का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया था।

मार्च के दूसरे सप्ताह में ही प्रदेश में गर्मी ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। ग्वालियर, चंबल, उज्जैन, इंदौर, भोपाल, नर्मदापुरम और सागर संभाग के कई जिलों में गर्मी का असर अधिक महसूस किया जा रहा है। शनिवार को नर्मदापुरम प्रदेश का सबसे गर्म जिला रहा, जहां अधिकतम तापमान 40.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से करीब 6.9 डिग्री अधिक है।

इसके अलावा खरगोन जिले में भी गर्मी का प्रभाव अधिक रहा और यहां तापमान 39.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मंडला, रतलाम, दमोह, खंडवा, खजुराहो, रायसेन, शाजापुर, गुना, नरसिंहपुर, रीवा, सतना, सिवनी, बैतूल, छिंदवाड़ा, टीकमगढ़, उमरिया, सागर और धार जैसे कई जिलों में तापमान 37 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक दर्ज किया गया।

मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में बढ़ती गर्मी का मुख्य कारण हवा की दिशा में बदलाव है। वर्तमान में हवाएं उत्तर-पूर्व से बदलकर पश्चिम और उत्तर-पश्चिम दिशा से चल रही हैं। इसके साथ ही वातावरण में नमी का स्तर काफी कम है। राजस्थान और अन्य रेगिस्तानी क्षेत्रों से आने वाली गर्म हवाएं मध्य प्रदेश के तापमान को बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही हैं।

इधर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी मार्च के मौसम को लेकर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। चिकित्सकों के अनुसार मार्च का महीना मौसमी बीमारियों के फैलने की दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है। दिन में तेज गर्मी और सुबह-शाम हल्की ठंड के कारण लोग अक्सर लापरवाही कर बैठते हैं। दिन में गर्मी से बचने के लिए हल्के कपड़े पहनना और अधिक मात्रा में ठंडे पेय पदार्थों का सेवन करना कई बार सर्दी-जुकाम, एलर्जी और अस्थमा जैसी समस्याओं को बढ़ा देता है।

डॉक्टरों का कहना है कि इस मौसम में सुबह और देर रात की ठंडी हवा से बचाव करना जरूरी है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सांस संबंधी रोगों से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। मौसम में हो रहे इस उतार-चढ़ाव को देखते हुए संतुलित दिनचर्या और सावधानी ही स्वास्थ्य की दृष्टि से सबसे सुरक्षित उपाय माना जा रहा है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here