मऊगंज (कुंडेश्वर टाइम्स)
प्रदेश सरकार द्वारा गौसंरक्षण और गौशाला संचालन के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन मऊगंज जिले में गौशाला व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जिले में गौशालाओं के संचालन और गौवंश की वास्तविक स्थिति को लेकर अब जांच की मांग उठने लगी है।
सूत्रों के अनुसार जिले में गौशाला संचालन और गौवंश के संरक्षण के लिए लगभग तीन करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया जा चुका है। रिकॉर्ड के अनुसार हजारों गौवंश गौशालाओं में संरक्षित बताए जा रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि बड़ी संख्या में गौवंश आज भी सड़कों और किसानों के खेतों में घूमते दिखाई दे रहे हैं, जिससे किसानों की फसल को नुकसान पहुंच रहा है।
इसी बीच कलेक्टर कार्यालय द्वारा जारी किए गए कई कारण बताओ नोटिसों में भी गौशालाओं की व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर कमियां सामने आई हैं। कुछ स्थानों पर निरीक्षण के दौरान पशुओं की संख्या कम पाई गई, चारा और पानी की व्यवस्था अपर्याप्त मिली, वहीं कुछ गौशालाओं में पशुओं के स्वास्थ्य को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
आम जनता की राय
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सरकार गौसंरक्षण के लिए पर्याप्त राशि उपलब्ध करा रही है तो फिर गौवंश खुले में क्यों घूम रहे हैं और किसानों की फसलें क्यों नष्ट हो रही हैं। इस पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
सामाजिक संगठनों और ग्रामीणों ने मांग की है कि जिले में संचालित सभी गौशालाओं का भौतिक सत्यापन और सामाजिक ऑडिट कराया जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि गौसंरक्षण के नाम पर खर्च की जा रही राशि का वास्तविक उपयोग किस प्रकार किया जाता है।


















